क्या उनसे सनातन धर्म के आचार्य जवाब नहीं मांग सकते? दूसरा- गेरुआ विरुद्ध गुलाबी। यानी गेरुआ कपड़ा पहनकर क्या कोई गुलाबी मांस का व्यापारी हो सकता है? पक्ष-विपक्ष दोनों को हमने आमंत्रित किया है। आइए पक्ष में हैं तो पक्ष में, विपक्ष में हैं तो विपक्ष में अपनी बात कहिए।भास्कर: अभी बहुत सारे संतों, मठ-मंदिरों से आपका संपर्क हो रहा होगा? इसका मतलब है, हिंदुओं का मुसलमानी शैली को प्रवेश कराया जा रहा है। यह अस्वीकार्य है।हम कुछ नहीं कह रहे, हम आपको बता रहे हैं कि देखिए वो एक मठ के महंत हैं, गद्दीनशीन हैं और मुख्यमंत्री हैं। महंती कहती है, संतत्व कहता है, गेरुआ कपड़ा कहता है कि एक भी प्राणी का वध मत करो। ठीक है? और मुख्यमंत्री का पद कहता है कि करोड़ों मार कर बेच लो, रेवेन्यू बढ़ना चाहिए, अपना राजस्व बढ़ना चाहिए।दोनों एक साथ तो नहीं हो सकता न?