Hindi NewsLocalRajasthanJaipurJaipur Family Court: Husbands Parents Separation, Property Greed, Cases Held Crueltyपति से मानसिक-शारीरिक क्रूरता करने के आधार पर शादी रद्द: कोर्ट ने कहा-पत्नी का माता-पिता से अलग रहने का दबाव बनाना और केस करना प्रताड़नाजयपुर 19 घंटे पहलेकॉपी लिंकप्रतीकात्मक फोटो।जयपुर के फैमिली कोर्ट ने मानसिक-शारीरिक क्रूरता और बिना किसी कारण अलग रहने के आधार पर 32 साल पुरानी शादी को रद्द कर दिया है। जयपुर महानगर-प्रथम के फैमिली कोर्ट-1 ने पति की विवाह विच्छेद (तलाक) की याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश दिए।अदालत ने कहा- मानसिक क्रूरता के लिए कोई एक घटना पर्याप्त नहीं होती है। इसके लिए क्रमवार घटित घटनाओं के प्रभाव को देखा जाना चाहिए। इस प्रकरण में पत्नी द्वारा पति पर माता-पिता से अलग रहने का दवाब बनाना, संपत्ति का लालच और पति के खिलाफ अनेक मुकदमे दर्ज करना क्रूरता की श्रेणी में आता है।वहीं, दोनों पिछले 8 साल से अलग-अलग रह रहे हैं। ऐसे में दोनों के बीच पिछले 8 साल में दाम्पत्य संबंध भी स्थापित नहीं हुए हैं। कोर्ट ने ये फैसला 30 जनवरी को सुनाया।पत्नी ने मानसिक क्रूरता कीमामले से जुड़े अधिवक्ता डीएस शेखावत ने बताया कि सवाई माधोपुर निवासी युवक और मुंबई की रहने वाली युवती की शादी साल 1994 में हुई थी। पति के अनुसार पत्नी शादी के कुछ माह बाद ही अपने मायके मुंबई चली गई।वहां से वापस आने के बाद माता-पिता से अलग रहने का दवाब बनाने लगी। इसके बाद पति, पत्नी को लेकर जयपुर आ गया। यहां साल 2005 में खुद का मकान भी ले लिया। लेकिन पत्नी लगातार पारिवारिक संपत्ति में से हिस्सा लेने का दबाव बनाती।बात नहीं मानने पर दोनों बच्चों को जहर देकर आत्महत्या करने की धमकी देती। विवश होकर पति ने अपनी पैतृक संपत्ति के दो मकान की पावर ऑफ अटॉर्नी पत्नी के नाम कर दी। इसमें से पत्नी ने एक प्लॉट अपनी बहन को दे दिया।सास से मधुर संबंध, फिर भी मुकदमावहीं, पति के आरोपों पर पत्नी ने कहा कि उसके सास-ससुर से मधुर संबंध थे। पति की अपने पिता से नहीं बनती थी। इसलिए उन्हें अपने व्यवसाय में शामिल नहीं करके अलग कर दिया था। इसलिए वह सवाई माधोपुर छोड़कर जयपुर आ गए थे। उसने कभी सास-ससुर का अपमान नहीं किया। उल्टा सास-ससुर पति से ज्यादा उस पर विश्वास करते थे।अदालत ने कहा- एक तरफ पत्नी कहती है कि उसके सास के साथ मधुर संबंध थे। वहीं, दूसरी ओर घरेलू हिंसा के मामले में सास के खिलाफ क्रूरता की बात कहती है। अगर उसके सास-ससुर उस पर अधिक विश्वास करते थे तो उसे सास को कोर्ट में साक्ष्य के रूप में पेश करना चाहिए था।अदालत ने कहा- पत्नी, पति द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन नहीं कर पाई है, न ही अपने समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य दे सकी है। वहीं, दोनों ने इस बात को स्वीकार किया है कि वह अक्टूबर-2017 से अलग-अलग रह रहे हैं।


Source:   Dainik Bhaskar
February 08, 2026 16:18 UTC