जितेंद्र शर्मा, नई दिल्ली। जैसे ही तय हुआ कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार शाम पांच बजे राज्य सभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देंगे, वैसे ही संसद के गलियारों में यह चर्चा के केंद्र में आ गया।खास तौर विपक्षी खेमा जैसे तय वक्त की प्रतीक्षा कर रहा हो, क्योंकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को न बोलने देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस इस राजनीतिक रार को राज्य सभा तक ले ही जा चुकी थी। दिनभर कांग्रेस नेताओं के राज्य सभा में भी पीएम मोदी को न बोलने देने के दावे किए।खरगे ने बुलाई बैठक मल्लिकार्जुन खरगे ने सहयोगी दलों की बैठक भी बुलाई। इससे सचेत राजग खेमे ने पूरी एकजुटता सदन में प्रदर्शित की, लेकिन कांग्रेस अपने नेता के कथित अपमान के मुद्दे पर एक तरह से अलग-थलग दिखाई दी। विरोध का प्रयास जरूर हंगामे के साथ हुआ, लेकिन सहयोगी दलों का अपेक्षित सहयोग न मिलने से यह ऊर्जा छह मिनट में सिमटती दिखाई दी।लोकसभा में विपक्षी दलों द्वारा उत्पन्न परिस्थितियों के कारण पीएम मोदी बुधवार को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देने नहीं गए। संभवत: इससे कांग्रेस का उत्साह बढ़ गया। जब गुरुवार को पीएम मोदी के राज्य सभा में चर्चा का जवाब देने का समय तय हुआ तो कांग्रेस अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष खरगे ने वहां भी इस मुद्दे को उठा कर सुबह ही संकेत दे दिया था कि यहां भी पीएम मोदी का कड़ा प्रतिरोध किया जाएगा।दोपहर में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने दावा किया कि यदि राहुल गांधी को लोकसभा में नहीं बोलने दिया गया तो हम भी पीएम को राज्य सभा में बोलने नहीं देंगे। दावा किया कि बहिर्गमन करने की बजाए लगातार सदन में रहकर नारेबाजी करेंगे। उनके सुर में टीएमसी के भी कुछ सांसदों ने सुर मिलाए।सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी एकजुटता के लिए बैठक भी हुई, लेकिन शाम होते-होते परिस्थितियां बदल गईं। पीएम मोदी जब राज्य सभा में चर्चा का जवाब देने के लिए पहुंचे तो राजग खेमे की कुर्सियां भरी हुई थीं, जबकि विपक्षी खेमे में कांग्रेस के सांसद तो खरगे सहित उपस्थित थे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस से कोई सदस्य नहीं था।किस-किस ने दिया खरगे का साथ ? सपा से संभवत: एक ही सदस्य कुछ देर के लिए आए। बहरहाल, जब पीएम ने बोलना शुरू किया तो खरगे आपत्ति जताते हुए खड़े हो गए। उनका साथ कांग्रेसी सांसदों के अलावा डीएमके सांसद त्रिची शिवा और सीपीआइ एम सांसद डा. जान ब्रिटास दे रहे थे। नारेबाजी तेज होने पर प्रधानमंत्री मोदी ने चुटकी ली कि खरगे जी उम्र को देखते हुए वह चाहें तो बैठकर नारे लगा सकते हैं।