संगठनों का दावा है कि करीब 30 करोड़ मजदूर इस हड़ताल में भाग ले सकते हैं. बंद के समर्थन में कई बैंक यूनियनें भी शामिल हो रही हैं, जिससे बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है. AIBEA, AIBOA और BEFI जैसी यूनियनों ने हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है, जिसके चलते सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज प्रभावित हो सकता है. बस, ऑटो और ट्रक यूनियनों के समर्थन के कारण सार्वजनिक और निजी परिवहन बाधित हो सकता है. सरकारी कार्यालयों में ट्रेड यूनियनों के प्रभाव वाले विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रह सकती है, जिससे कामकाज धीमा हो सकता है.