PF contribution: Few Categories May Get Permission To Reduce Provident Fund Contribution - News Summed Up

PF contribution: Few Categories May Get Permission To Reduce Provident Fund Contribution


हाइलाइट्स PF में कम कंट्रिब्यूशन का नियम सबके लिए लागू नहीं होगालेबर मिनिस्ट्री 2-3% कम PF कंट्रिब्यूशन की इजाजत के दायरे में आने वाले वर्कर्स की कैटिगरी तय करने के प्रस्तावित मानकों पर विचार कर रही हैअभी सभी कर्मचारियों को अपनी बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा अनिवार्य रूप से PF में देना होता हैएंप्लॉयर भी इतना ही योगदान करता है और इस अंशदान में से 8.33 प्रतिशत हिस्सा एंप्लॉयी पेंशन स्कीम में जाता हैकौन-सी जरूरत के लिए PF से निकाल सकते हैं कितना पैसा? प्रॉविडेंट फंड(PF) को लेकर हाल में सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं। अगर कोई अपने PF फंड में से पैसा निकालना चाहता है तो उसे ऑनलाइन ही क्लेम करना होगा। आइए जानें आप किस जरूरत के लिए आप कितना पैसा निकाल सकते हैं और PF से पैसे निकालने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका।अपने पीएफ अकाउंट से आप कितनी रकम निकाल सकते हैं यह आपके अकाउंट की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर आप अपनी संतान, भाई/बहन या अपनी शादी के लिए पीएफ से रकम निकालना चाहते हैं तो आपकी तरफ से PF अकाउंट में किए गए योगदान का 50% हिस्सा निकाल सकते हैं।पत्नी या संतान की उच्च शिक्षा के लिए आप PF अकाउंट में अपने योगदान का 50% रकम ब्याज के साथ निकाल सकते हैं। हालांकि दोनों मामलों में यह जरूरी है कि आपको जॉब करते हुए कम से कम 7 साल पूरे हो गए हों।अगर आप घर या जमीन खरीदना चाहते हैं और आपको जॉब करते हुए पांच साल पूरे हो चुके हैं तो आप कुछ शर्तों के साथ PF अकाउंट से रकम निकालने के लिए आवेदन कर सकते हैं। प्लॉट खरीदने के लिए आप मासिक वेतन से 24 गुना तक और घर खरीदने/बनाने के लिए मासिक वेतन का 36 गुना तक पीएफ निकाल सकते हैं। इस मामले में आप अपने और नियोक्ता दोनों के योगदान और ब्याज की रकम में से क्लेम कर सकते हैं।अगर आप स्वयं, पत्नी, बच्चों या फिर माता-पिता के इलाज के लिए पैसे चाहते हैं तो आप अपनी सैलरी का 6 गुना या पीएफ की पूरी रकम, जो भी कम हो, निकाल सकते हैं। किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में भी आप पीएफ अकाउंट से पैसे निकाल सकते हैं। इसके लिए आपको एक महीने या अधिक समय तक अस्पताल में दाखिल रहने का सबूत, लीव सर्टिफिकेट और ईएसआई की सुविधा नहीं दी जाने की घोषणा के बारे में नियोक्ता या ईएसआई द्वारा जारी सर्टिफिकेट की जरूरत होगी।पिछले साल EPFO ने अपने कर्मचारियों के एक महीने से अधिक समय तक बिना जॉब के रहने पर पीएफ का 75 फीसदी हिस्सा निकालने की अनुमति दी थी। PF में जमा बाकी 25 फीसदी हिस्से को जॉब छूटने के दो महीने बाद निकाला जा सकता है।- सबसे पहले EPFO की वेबसाइट unifiedportal-mem.epfindia.gov.in पर जाएं।- यहां आप अपना UAN नंबर, पासवर्ड और कैप्चा डालकर लॉगइन करें।- इसके बाद Manage पर क्लिक करें और अपना KYC चेक कर लें।- फिर Online Services पर जाकर CLAIM (FORM-31, 19&10C) पर क्लिक करें।- यहां पर EPF के पूरे पैसे निकालने, लोन और अडवांस के लिए कुछ पैसा निकालने के ऑप्शन मिलेंगे। आप जिस कारण से पैसे निकालना चाहते हैं उस ऑप्शन को सिलेक्ट करें।ऑप्शन सिलेक्ट करने के बाद जरूरत और नियम के अनुसार आप अपने क्लेम फॉर्म को ऑनलाइन भरें। फॉर्म भरने के 10 दिनों के अंदर आपके रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट में PF की राशि जमा हो जाएगी।वर्किंग वुमन, विकलांग प्रफेशनल या 25-35 साल के कामकाजी पुरुषों को प्रॉविडेंट फंड में कंट्रीब्यूशन 2-3 प्रतिशत घटाने की इजाजत मिल सकती है। एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने ईटी को बताया कि PF में कम कंट्रिब्यूशन का नियम सबके लिए लागू नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'यह यूनिवर्सल नहीं होगा। कुछ ही श्रेणियों के लिए इसकी इजाजत दी जाएगी।' उन्होंने बताया कि वर्कर्स की इन श्रेणियों का निर्धारण कुछ मानकों के आधार पर किया जाएगा।जिन मानकों पर विचार किया जा रहा है, उनमें एक यह भी है कि कामकाजी महिलाओं और विकलांग पेशेवर लोगों को इस श्रेणी में रखा जा सकता है। लेबर मिनिस्ट्री 2-3 प्रतिशत कम पीएफ कंट्रिब्यूशन की इजाजत के दायरे में आने वाले वर्कर्स की कैटिगरी तय करने के प्रस्तावित मानकों पर विचार कर रही है। इस संबंध में जल्द निर्णय किया जा सकता है।अधिकारी ने कहा, 'सरकार को अहसास है कि रिटायरमेंट के समय सोशल सिक्यॉरिटी की जरूरत होती है। हालांकि युवा कर्मचारियों को शादी, मकान खरीदने और करियर के शुरुआती वर्षों में दूसरी जरूरतों के लिए हाथ में ज्यादा पैसे की आवश्यकता भी होती है। इसी को देखते हुए इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।'अभी सभी कर्मचारियों को अपनी बेसिक सैलरी का 12 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से एंप्लॉयीज प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन के तहत देना होता है और इतनी ही रकम उनके एंप्लॉयर की ओर से आती है। एंप्लॉयर के अंशदान में से 8.33 प्रतिशत हिस्सा एंप्लॉयी पेंशन स्कीम में जाता है। कोड ऑन सोशल सिक्यॉरिटी 2019 के तहत लेबर मिनिस्ट्री ने एंप्लॉयी प्रॉविडेंट फंड ऐंड मिसलेनियस प्रॉविजंस ऐक्ट में नरमी का प्रस्ताव दिया है जिससे कंट्रीब्यूशन की अलग-अलग दरों की इजाजत मिल जाएगी।एंप्लॉयर की ओर से आने वाले अंशदान में बदलाव का प्रस्ताव नहीं है। संसद मे रखा गया यह बिल अब श्रम मामलों की स्थायी समिति के सामने है। कोड को संसद से मंजूरी मिलने के बाद श्रेणी तय करने वाले नियमों को मंत्रालय नोटिफाई करेगा। इसके पीछे सोच यह है कि कुछ कैटिगरी के एक खास उम्र वाले वर्कर्स को पीएफ में अंशदान घटाने की इजाजत दी जाए ताकि उनकी टेक होम सैलरी बढ़े।EPS कंट्रीब्यूशन की गणना 15000 रुपये की बेसिक पे या ऐक्चुअल बेसिक पे, जो भी कम हो के आधार पर की जाती है। अगर बेसिक सैलरी 15000 रुपये से ज्यादा हो तो EPS कंट्रिब्यूशन 15000 रुपये के 8.33 प्रतिशत के बराबर होगा, जो कि 1250 रुपये महीना होता है।


Source: Navbharat Times January 22, 2020 03:32 UTC



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