Lucknow Samachar: लिट फेस्ट - lit fest - News Summed Up

Lucknow Samachar: लिट फेस्ट - lit fest


\Bमुशायरे संग हुई शायरी की बैतबाजी\Bबैतबाजी में करामत स्कूल और खुनखुनजी के दलों ने बेहतरीन तैयारी और पढ़ने के दिलकश अंदाज से सबका दिल जीत लिया। इसमें रेशमां परवीन के संचालन में युसरा फारुकी, सानिया, कहकशां, दरक्षा युसूफ आरिफ, रजा अबरार, हलीमा उबेद, मंतजा सिराज ने हिस्सा लिया। मुशायरे में करामत स्कूल के प्रतिभागियों ने मौजूदा दौर पर भी रचनाएं सुनाईं। कहकशां खातून ने अपनी रचना 'नफरत के चिरागों को बुझा करके तो देखो फिर शम ए मोहब्बत से जला कर तो देखो...' सुनाई। इस क्रम में दरक्षा ने शायरी 'मिली है बहुत चोट रिश्तों से मुझको, मैं रिश्तों को फिर भी निभाती रही हूं...'। उम्मे हिलाल और युसूफ आरिफ, सना ने भी अपनी रचनाएं सुनाईं। इसके बाद खुनखुनजी कॉलेज की सानिया और युसरा ने अपनी रचनाएं पेश कीं।\Bबलात्कारियों की दरिंदगी का किया गिद्ध ने विरोध\Bबलात्कारियों की तुलना गिद्ध से किए जाने का विरोध डॉ़ लता कादम्बरी की कहानी 'गिद्ध' के जरिए किया गया। इसके बाद डॉ़ लता कादम्बरी की किताब 'टवीट कहानियां' पर डिम्पल त्रिवेदी ने चर्चा की। 'ईश की मां' कहानी के माध्यम से बिन ब्याही मां का दर्द बखूबी पेश किया गया। लोगों ने मल्टीमीडिया विडियो शो भी देखा।\Bलखनऊ के लेखकों के इतिहास को संजोया जाए\Bगौरव प्रकाश के संचालन में हुए 'द लखनऊ राइटर्स' सत्र में अनी जैदी ने कहा कि लखनऊ शहर को पहचान देने वाले मीर अनीस की कब्र आज भी उपेक्षित है। जिस समाज में लेखकों को सम्मान दिया जाता है उस समाज की नई पीढ़ी अपने आप ही संस्कारवान हो जाती है। इसके बाद अखिल कत्याल ने एक ही रचना हिन्दी और पंजाबी में सुनाकर प्रशंसा हासिल की।'मैंने अनुभव से सीखा है' पुस्तक के लेखक विश्व भूषण ने शुभ्रा मित्तल के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि अनुभव सबसे बड़ी पाठशाला है। उस पुस्तक को लिखने में उन्हें 14 साल लगे। इसमें उनके व्यक्तिगत घटनाक्रम न होकर उन घटनाक्रमों की मनोवृत्तियों को समेटा गया है। अयोध्या में जन्मे विश्व भूषण वर्तमान में उत्तर प्रदेश प्राशसनिक सेवा में कार्यरत हैं।\Bबुदेली गीतों से जीवंत की बुदेलखंड की संस्कृति\Bकादम्बनी क्लब की ओर से हुए 'बुन्देली संस्कृति धरोहर' शीर्षक के सत्र में डॉ.मधु चतुर्वेदी की परिकल्पना में श्रद्धा लिटोरिया के दल ने देवी गीत सुनाए। रजनी पाठक के आल्हा गायन के बाद पुष्पा अग्रवाल के दल ने 'फाग' सुनाया। देवकी नंदन शांत ने 'सावन बीतौ जात हमरवां ससुराल में...' जैसे गीत सुनाए। ईसुरी की चौकड़ियां भी खासी सराही गईं। सत्र का संचालन आकांक्षा पाठक ने किया।\Bसलीम आरिफ को याद आती हैं लखनऊ की गलियां\Bरंगकर्मी सलीम आरिफ ने कहा कि उन्होंने लखनऊ छोड़ा है लखनऊ उनसे नहीं छूटा। उनके जहन में आज भी लखनऊ की गलियां सांस ले रही हैं। आरजे प्रतीक के सवालों पर लुबना ने कहा कि लखनऊ तुम-तुम करते आते थे और हम-हम करते जाते हैं।\Bगुलाम अली वारसी ब्रदर्स की कव्वाली में महका सूफियाना अंदाज\Bगुलाम अली वारसी ब्रदर्स ने समारोह में जलसा के मुक्ताकाशी मंच पर 'अल्लाह-हू अल्लाह-हू' और 'छाप तिलक सब छीन ली रे मोसे नैना मिलाइके...' जैसी सूफियाना रचनाएं सुनाकर तारीफें बटोरी। इसमें उनका साथ फैय्याज, सलीम, नियाज, मौहम्मद कैफ ने दिया। फरमाइश पर उन्होंने 'मेरे रश्क-ए-कमर...' गीत और 'दमादम मस्त कलंदर...' भजन सुनाया।


Source: Navbharat Times December 09, 2019 00:56 UTC



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