पर्सनल फाइनेंस / कम समय के लिए लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट टर्म जबकि लंबे समय के लिए लांग ड्यूरेशन और गिल्ट फंड्स में करें एसआईपी - News Summed Up

पर्सनल फाइनेंस / कम समय के लिए लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट टर्म जबकि लंबे समय के लिए लांग ड्यूरेशन और गिल्ट फंड्स में करें एसआईपी


बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए डेट फंड में करें निवेशविकसित अर्थव्यवस्था में इस तरह के निवेश पर मिलेगा अच्छा रिटर्नदैनिक भास्कर Jun 01, 2020, 08:50 PM ISTमुंबई. शेयर बाजार में कम रिटर्न के कारण फाइनेंशियल एडवाइजर इस समय म्यूचुअल फंड के डेट प्रोडक्ट्स में एसआईपी करने की सलाह दे रहे हैं। कम अवधि के लिए लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड्स में निवेश की सलाह दी जा रही है। लंबी अवधि के लिए निवेशकों को लांग ड्यूरेशन या गिल्ट फंड्स में निवेश करने की सलाह दी जा रही है।एसआईपी से ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव का सामना किया जा सकता हैएसबीआई म्यूचुअल फंड के कार्यकारी निदेशक डीपी सिंह कहते हैं कि म्यूचुअल फंड में एसआईपी से ब्याज दर के उतार-चढ़ाव का सामना किया जा सकता है। लंबी अवधि में संपत्ति का निर्माण भी किया जा सकता है। यह सस्ता भी है। कारण कि निवेशक कम रकम के साथ निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। अगले दो दशकों में भारत की अर्थव्यवस्था ज्यादा मैच्योर होनेवाली है। ऐसी स्थिति में रिटर्न की अपेक्षा भी विकसित अर्थव्यवस्था से ही की जा सकती है। इससे जोखिम समायोजित के आधार पर डेट फंड्स से लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न प्राप्त हो सकता है।एसआईपी लंबे समय तक चलाएंडेट म्यूचुअल फंड्स में एसआईपी या सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान लंबे समय तक चलता है। लेकिन असेट मैनेजर्स और वितरक इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में एसआईपी पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। इस तरह की एसआईपी के मार्फत मासिक 8,000 करोड़ रुपए म्यूचुअल फंड के पास आ रहा है। पिछले वित्त वर्ष में एसआईपी का कुल कलेक्शन एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का था।एसआईपी का पांच प्रतिशत हिस्सा डेट फंड मेंडेट फंड और इक्विटी फंड की एसआईपी का अलग-अलग डेटा नहीं होता है। लेकिन एक अंदाज के मुताबिक डेट एसआईपी कुल फंड्स का पांच प्रतिशत से भी कम है। शेयर बाजार में जैसे उतार-चढ़ाव होता है, उसी तरह से डेट मार्केट में भी ब्याज दर में उतार-चढ़ाव होता रहता है। इससे लंबे समय के डेट फंड्स के रिटर्न पर असर होता है।मासिक 1,000 रुपए का एसआईपी है बेहतरवितरकों का कहना है कि मासिक 1,000 रुपए से चालू की गई एसआईपी ज्यादा लाभदायक होती है। निवेशकों को इस समय भविष्य के प्रति सजग रहना चाहिए। कारण कि बिजनेस पर असर दिख रहा है। कई लोगों की नौकरियां जा रही हैं। ऐसी स्थिति में लंबी अवधि के लिए इक्विटी में निवेश चालू रखना थोड़ा जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में निवेशकों को लिक्विड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म में निवेश करना चाहिए।आंकड़े बताते हैं कि गिल्ट फंड्स में पांच वर्ष की एसआईपी का रिटर्न 9.34 प्रतिशत रहा है। इसके बाद लिक्विड फंड्स में औसत रिटर्न 6.49 प्रतिशत रहा है। ज्यादातर फाइनेंशियल प्लानर्स अगले तीन वर्ष के लिए लिक्विड, अल्ट्रा शॉर्ट टर्म फंड में निवेश की सलाह दे रहे हैं।


Source: Dainik Bhaskar June 01, 2020 15:56 UTC



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