कार्तिक के आक्रोशित परिजनों ने कहा, मंत्री का वादा झूठा, करेंगे सीएम के रोड शो का विरोध

कार्तिक के आक्रोशित परिजनों ने कहा, मंत्री का वादा झूठा, करेंगे सीएम के रोड शो का विरोधसंवाद सूत्र, थर्मल : बस के पहिये के नीचे कुचले गए मासूम कार्तिक के परिजनों ने सोमवार को कच्चा कैंप में बैठक कर रोष जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार के आश्वासन के बाद भी पुलिस आरोपित बस चालक व स्कूल प्रबंधक को गिरफ्तार नहीं किया। मंत्री का वादा झूठा रहा। उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे मंगलवार को सीएम के रोड शो में बाधा पहुंचाएंगे।पीड़ित पिता संजय कुमार व मां रजनी ने कहा कि पुलिस आरोपितों के दबाव में है। सात दिन से आरोपित खुले में घूम रहे हैं और पुलिस सिर्फ छापामारी का दिखावा कर रही है। वे सीएम को ज्ञापन सौंपेंगे। अगर फिर भी सुनवाई नहीं हुए तो भूख हड़ताल पर बैठेंगे। इस मौके पर संजय कुमार, नरेन्द्र कुमार, निर्मला, मदन लाल, आरती और संतोष मौजूद रहीं।इस बारे में थाना मॉडल टाउन प्रभारी हरविद्र सिंह का कहना है कि आरोपित चालक व स्कूल प्रबंधक के संभावित ठिकानों पर छापामारी की जा रही है। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।यह है मामला19 मार्च को पूरेवाल कॉलोनी के संजय पाहुजा की पत्नी रजनी, बहन शालू, सलहज प्रिया, मां संतोष और परिवार के अन्य सदस्य आसन कलां के गुरुद्वारा जोध सचियार में सत्संग सुनने गए थे। वे सब जोध सचियार पब्लिक स्कूल की बस से ही वापस आ रहे थे। संजय का पांच साल का बेटा कार्तिक बड़े भाई जतिन के साथ सीट पर बैठा था।खुखराना के पास ब्रेकर आते ही पहिये के ऊपर रखा लकड़ी का फट्टा खिसक गया और कार्तिक खाली जगह से नीचे निकल गया। पिछले पहिये ने उसका सिर कुचल दिया। थाना मॉडल टाउन मे आरोपित चालक व स्कूल प्रबंधक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया था।Posted By: Jagran

March 26, 2019 01:07 UTC


मध्यप्रदेश / भोपाल समेत 7 सीटों पर फैसला टला

Dainik Bhaskar Mar 26, 2019, 05:44 AM ISTभाजपा की 14 नामों की सूची अमित शाह की मुहर के लिए अटकीभोपाल . भाजपा की मप्र की शेष 14 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम का ऐलान फिलहाल दो से तीन दिन के लिए अटक गया है। सोमवार को दिल्ली में प्रदेश भाजपा के नेताओं शिवराज सिंह चौहान, गोपाल भार्गव, संगठन महामंत्री सुहास भगत, विनय सहस्त्रबुद्धे की पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के करीबी व राष्ट्रीय महासचिव अनिल जैन के साथ लंबी चर्चा हुई। जैन को भोपाल, इंदौर, रतलाम, सागर, गुना-शिवपुरी, विदिशा और राजगढ़ लोकसभा सीटों पर प्रदेश नेतृत्व द्वारा तय किए गए नामों की सूची सौंपी गई।इसके बाद जैन ने अमित शाह को इन सीटों पर प्रदेश संगठन द्वारा सुझाए गए नामों की विस्तृत जानकारी दी। माना जा रहा है कि इन नामों पर तकरीबन सहमति बन गई है। सिर्फ इस पर शाह की मुहर लगना बाकी है। इन नामों में इंदौर से सुमित्रा महाजन का नाम भी प्रस्तावित किया गया है, लेकिन महाजन पर पार्टी नेतृत्व अभी तक कोई फैसला नहीं ले पाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह को महाजन से बात करनी है, पर केंद्रीय नेतृत्व की सहमति के बाद ही यह बातचीत करना तय हुआ है। वहीं भोपाल सीट से शिवराज के साथ ही महापौर आलोक शर्मा और महामंत्री वीडी शर्मा के नाम पर भी मंथन जारी है, पर इस पर केंद्रीय नेतृत्व अंतिम निर्णय नहीं ले पा रहा है।राघवजी ने पेश की बेटी की दावेदारी : विदिशा को लेकर पूर्व वित्त मंत्री राघव जी ने अपनी बेटी ज्योति की दावेदारी दिल्ली में पेश की है। सुखप्रीत कौर ने भी केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर दावेदारी रखी है। पूर्व में शिवराज सिंह की पत्नी साधना सिंह का सामने था, लेकिन केंद्रीय चुनाव समिति के क्राइटेरिया तय करने के बाद अब अन्य दावेदारों ने जोर लगाया है। इसी तरह बालाघाट के लिए पूर्व मंत्री ढाल सिंह बिसेन और पूर्व सांसद नीता पटेरिया ने भी दिल्ली में डेरा जमा लिया है। कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू ने अपना पक्ष रखा है। इन सब खींचतान को देखते हुए प्रदेश के नेताओं ने अनिल जैन से चर्चा कर अंतिम निर्णय केंद्रीय चुनाव समिति पर छोड़ दिया है।ग्वालियर से अब सिर्फ शेजवलकर का नाम : एक दिन पहले तक ग्वालियर सीट से पूर्व मंत्री मायासिंह के साथ ही महापौर विवेक शेजवलकर का नाम चर्चा में था, पर सोमवार को जैन के समक्ष प्रदेश के नेताओं ने विवेक शेजवलकर का नाम रखा। बालाघाट से मौजूदा सांसद बोध सिंह भगत का भी नाम दिया गया।

March 26, 2019 00:11 UTC


3 साल से सूखा विदर्भ भाजपा से खफा, लेकिन नक्सलियों पर नकेल से फायदा संभव - Dainik Bhaskar

Dainik Bhaskar Mar 26, 2019, 08:02 AM ISTनागपुर, रामटेक, वर्धा, चंद्रपुर, गढ़ चिरौली-चिमौर, भंडारा-गोंदिया का गणितमहाराष्ट्र का यह क्षेत्र किसान आत्महत्या से बदनाम, नोटबंदी और जीएसटी जैसे मुद्दे यहां असर दिखाएंगेनागपुर/महाराष्ट्र (भंवर जांगिड़) . महाराष्ट्र का विदर्भ...पहुंचा तो हलक सूखा हुआ था...यह वो इलाका है, जो किसानों की आत्महत्याओं के लिए कुख्यात रहा है। तीन साल से सूखा पड़ा हुआ है। सिर्फ जमीन नहीं सूखी, किसानों के सपने भी पपड़ी बनकर उखड़ रहे हैं।नागपुर के वड़ी में रहने वाले शाहदेव गुस्से से कहते हैं...सरकार तो हमें मरा हुआ ही समझ चुकी है। हमें पूछता कौन है?..., कहने को दो हैक्टेयर जमीन है, अनार उगाता हूं। पर मिलता क्या है? शाहदेव से जब किसान सम्मान योजना के पैसों के बारे में पूछा तो उल्टा उसने आंखें तरेरकर पूछा- मिला किसे है अब तक पैसा। शाहदेव का गुस्सा ही यहां का सबसे बड़ा जमीनी सच है। यहां देश की जीडीपी की रफ्तार...किसानों की मौतों से पीछे दिखाई देती है। एक अध्ययन के अनुसार 1997 से 2006 के बीच खुदकुशी करने वाला हर पांचवां किसान महाराष्ट्र से था।महाराष्ट्र की 48 में से दस सीटें विदर्भ से आती हैं और यह दो हिस्सों पूर्वी और पश्चिमी में बंटा है। मौजूदा स्थिति की बात करें तो पूर्वी विदर्भ की 6 में से 5 सीटों पर भाजपा और पश्चिमी विदर्भ की 4 में से 3 सीटों पर शिवसेना के सांसद हैं। ‘फेविकोल का मजबूत जोड़’ कहे जाने वाले शिवसेना-भाजपा गठबंधन की स्थिति यूं तो विदर्भ में दमदार दिखती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में नाराजगी दिखाई देती है। किसान सम्मान योजना यहां मजाक से ज्यादा कुछ नहीं लगती। विदर्भ की सबसे हॉट सीट नागपुर है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी यहां से मैदान में हैं। उनका सामना कांग्रेस के नाना पटोले से हैं। पटोले भंडारा-गोंदिया से पिछली बार भाजपा के टिकट पर जीते थे। मंत्री नहीं बनाने से नाराज होकर अब कांग्रेस के पाले में हैं।कांग्रेस ने पटोले पर मुस्लिम, अजा व कुनबी जाति के करीब छह लाख वोटों के भरोसे दांव लगाया है। विदर्भ के राजनीतिक विश्लेषक प्रो. जवाहर चरड़े कहते हैं कि गडकरी ने विकास के साथ जातीय गणित भी बैठा रखा हैे। भाजपा ने कुणबी समाज से महापौर व दो विधायक दे रखे हैं, यह पटोले के वोट काटने में मदद करेंगे। भाजपा के वोट बैंक में ढाई लाख तेली, एक-एक लाख महाराष्ट्रीयन ब्राह्मण व सिंधी, पांच लाख ओबीसी और डेढ़ लाख हिंदी भाषी हैं। यहां कांग्रेस का संगठन कमजोर हैं, जबकि संघ का मुख्यालय होने से यहां भाजपा बहुत मजबूत है।रामटेक नागपुर की पड़ाेसी लोकसभा सीट है। इस सीट से पीवी नरसिंह राव भी एक बार सांसद रहे हैं। जर्नलिस्ट व लेखक संजय तिवारी के मुताबिक शिवसेना का यहां संगठन नहीं है। वह भाजपा भरोसे है। यहां संतरे की खेती आजीविका का साधन है और काम नकद में होता था। नोटबंदी के वक्त 30 हजार रुपए प्रति टन का संतरा 12 हजार पर पहुंच गया था। इससे किसानों को नुकसान हुआ। वर्धा वही सीट है, जहां से मोदी ने पिछले चुनाव में महाराष्ट्र में प्रचार की शुरुआत की थी। यहां भाजपा के रामदास तड़स सांसद हैं। वे महाराष्ट्र तेली समाज के अध्यक्ष हैं और उनका समाज यहां अच्छा खास दबदबा रखता है। इस बार कांग्रेस ने चारूलता राव टोकस को उतारा है।चंद्रपुर, महाराष्ट्र का वो क्षेत्र है, जहां तापमान सर्वाधिक रहता है। मौसमी भी और चुनावी भी। यहां खेती करने वाले शंकर कहते हैं- मोदीजी ने यहां चाय पर चर्चा की थी, कहा था कि उनका कपास सीधा फैक्ट्री जाएगा। अच्छे दाम मिलेंगे। किसानों ने खूब वोट दिए, परंतु उन्होंने वादा पूरा ही नहीं किया। एसटी आरक्षित गढ़चिरौली- चिमौर लोकसभा चंद्रपुर, गढ़चिरौली व गोदिंया जिलों से बनी है। यहां 6 लाख आदिवासी है। इनमें से 1 लाख घने जंगलों में रहते हैं।डा. देवराव होली के मुताबिक पिछले पांच सालों में केंद्र व राज्य की भाजपा सरकार ने नक्सलियों को काफी कंट्रोल किया। विकास के लिए भी खूब पैसा दिया। इसका फायदा मिल सकता है। भंडारा-गोंदिया लोकसभा सीट इस बार एनसीपी के खाते में जुड़ सकती है। मोदी लहर में नाना पटोले ने प्रफुल्ल पटेल को हराया था अब पटोले नागपुर सीट पर कांग्रेस से हाथ आजमा रहे हैं। उप चुनाव में एनसीपी यह सीट जीती थी। पटोले ने काम नहीं किया था, उसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ेगा।चुनावी गणित : मुद्दों से लेकर सीटों की गणित तकमुद्दे - सूखा और पलायन सबसे असरदार : किसानों की आत्महत्या का मुद्दा इन सीटों पर सबसे बड़ा है। सबसे निर्णायक भी साबित हो सकता है। जीएसटी और नोटबंदी का असर भी दिखता है। धान काटने के लिए लोग दूसरे प्रदेशों में पलायन कर रहे हैं। बेरोजगारी भी बड़ा फैक्टर है। नोटबंदी-जीएसटी से संतरा व्यापार पर असर पड़ा है। विकास भी यहां बड़ा मुद्दा रहेगा।गठबंधन का गणित : भाजपा-शिवसेना और कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन। मगर बसपा व प्रकाश आंबेडकर की बहुजन वंचित आघाड़ी पार्टी के प्रत्याशियों से कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन को नुकसान हो सकता है।जाति का समीकरण : कुणबी, बंजारा, माली, तेली, मुस्लिम, दलित निर्णायक वोटर हैं। तेली-माली-हिंदी भाषी व ओबीसी को भाजपा के साथ माना जाता है। वहीं कुणबी, मुस्लिम, बंजारा व दलित को कांग्रेस के साथ देखा जाता है।मौजूदा स्थिति: छह में से पांच सीटों पर भाजपा, एक पर शिवसेना

March 26, 2019 00:06 UTC


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