Ex-CFO Shashidhar Kotian arrested in NSEL scam

MUMBAI: The economic offences wing of the city police, probing the Rs 5,600-crore NSEL scam , has arrested Shashidhar Kotian , the former chief financial officer of the now-shuttered commodities spot exchange, a senior official said.Kotian was arrested in connection with the scam and was produced before a court Friday, which remanded him to police custody till January 28, an official said. The agency sought his remand on the ground that they have come across from fresh facts and need to confront with the same.The NSEL scam refers to the payment crisis driven by the physical absence of the commodities against the invested money. As many as 13,000 investors have claimed losses after the trading platform faced a payment crisis, forcing the government to order its shuttering.The crisis broke out on July 31, 2013 and since then ownership of the company was taken away by the government and regulators from original promoter Jignesh Shah On December 27, 2018, the Mumbai police filed charge sheets against 63 entities-- 27 individuals and 36 companies.Companies named as accused in the chargesheet include NSEL, 63 Moons Technologies (the present company Shah owns after the ownership of his flagship Financial Technologies was taken away from him), India Bullion Market Association; commodities brokerages like Anand Rathi Commodities, Geofin Comtrade and India Infoline Commodities among others.Several other companies who also defaulted on paying back investors have also been named as accused in the chargesheet which lists cheating, criminal conspiracy under IPC and several sections of the Maharashtra Protection of Investors and Depositors Act and includes a statement of 520 witnesses and details of 509 bank accounts.Earlier in 2014, the police had filed a chargesheet against six individuals and subsequently against NSEL founder Jignesh Shah who was arrested on May 7, 2014 and is now out on bail.

January 18, 2019 16:30 UTC


गली बॉय के दर्शकों को मिलेगा सरप्राइज, फिल्म की टीम कर रही है तैयारियां

खास बातें 14 फरवरी को रिलीज हो रही है फिल्म जोया अख्तर ने की है डायरेक्ट रणवीर सिंह बने हैं रैपरजोया अख्तर (Zoya Akhtar) के निर्देशन में बनी गली बॉय (Gully Boy) अपने दर्शकों को सरप्राइज देने के लिए तैयार है. हाल ही में रिलीज हुए फ़िल्म के गीत अपना टाइम आयेगा (Apna Time Ayega) की भारी सफलता के बाद, निर्माता दर्शकों के लिए कुछ खास लेकर आ रहे हैं. फिल्म (Gully Boy) की घोषणा के बाद से ही गली बॉय सुर्खियों में बनी हुई है. 'गली बॉय' के 'अपना टाइम आएगा' सॉन्ग में रणवीर सिंह का जबरदस्त रैप, यूं उड़ाया गरदा- देखें Videoशानदार प्रतिक्रिया के बाद, निर्माता अब अपने दर्शकों के लिए एक ख़ास सरप्राइज ले कर आए हैं. दुनिया भर के फैंस सोशल मीडिया पर फिल्म पर अपने प्यार की बौछार कर रहे हैं और बेसब्री से फ़िल्म की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं.

Source:NDTV

January 18, 2019 16:07 UTC


कोलेजियम ने वापस ली वकील अमित नेगी को जज बनाने की सिफारिश

माला दीक्षित, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने हाईकोर्ट न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में कई अहम फैसले लिये हैं। कोलेजियम ने वकील अमित नेगी को इलाहाबाद हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनाने की अपनी सिफारिश वापस ले ली है। अब अमित नेगी के हाईकोर्ट का जज बनने की संभावनाएं समाप्त हो गई हैं। हालांकि इससे पहले दो बार सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने उनके नाम की सिफारिश सरकार को भेजी थी लेकिन सरकार ने फाइल पुनर्विचार के लिए लौटा दी थी। इतना ही नहीं कोलेजियम ने सरकार की ओर से पुनर्विचार के लिए लौटाई गई वकील नाजिर अहमद बेग को जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट का जज बनाने की सिफारिश भी वापस ले ली है। जबकि वकील वसीम सादिक नारगल के बारे में सरकार से कुछ और जानकारी मांगते हुए मामला विचाराधीन रखा है। दोनों का नाम सरकार ने वापस भेज दिया था।कोलेजियम ने इसके अलावा भी कई अहम फैसले किये हैं जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से जज बनाने की सिफारिश के साथ भेजे गए चार वकीलों के नामों में से पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीएन किरपाल के बेटे सौरभ किरपाल और एक अन्य वकील कृष्णेन्दु दत्ता के नामों पर विचार 2-3 सप्ताह के लिए टाल दिया है जबकि बाकी के दो वकीलों सुश्री प्रिया कुमार और संजय घोष के नाम हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश को वापस भेज दिये हैं। साथ ही कोलेजियम ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट से जज बनाने की सिफारिश के साथ भेजे गए सात वकीलों के नाम हाईकोर्ट को वापस भेज दिये हैं। कुछ फैसले कलकत्ता और बाम्बे हाईकोर्ट के बारे में भी हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने ये सारे फैसले गत 16 जनवरी की बैठक में लिए। सभी फैसले सुप्रीम कोर्ट वेबसाइट पर डाल दिए गए हैं।वैसे तो इससे पहले गत 4 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने सरकार की ओर से पुनर्विचार के लिए वापस भेजी गई अमित नेगी की फाइल पर दोबारा सिफारिश की अपनी मुहर लगा कर यह कहते हुए वापस कर दी गई थी कि जिन मुद्दों पर पुनर्विचार के लिए कहा गया है उन पर पहले ही विचार हो चुका है कोई नया तथ्य नहीं दिया गया है। लेकिन इसके बाद सरकार ने फिर नेगी की फाइल वापस भेजी जिस पर कोलेजियम ने 16 जनवरी को विचार किया।कोलेजियम ने नेगी को जज बनाने की सिफारिश वापस लेते हुए अपने निर्णय में लिखा है कि न्याय विभाग की ओर से नये तथ्यों के आधार पर की गई टिप्पणियों और रिकार्ड पर भेजे गए नये तथ्यों को देखने के बाद कोलेजियम को वकील अमित नेगी को जज बनाने की सिफारिश का प्रस्ताव वापस लेना ही उचित लगता है। कोलेजियम अपना प्रस्ताव वापस लेती है और अब इस पर आगे कोई कार्यवाही करने की जरूरत नहीं है। नेगी को जज बनाने की इलाहाबाद हाईकोर्ट कोलेजियम ने सबसे पहले 11 अप्रैल 2016 को सिफारिश की थी और तब से यह मामला कोलेजियम और सरकार के बीच चक्कर काट रहा था।सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट न्यायाधीश पीके जायसवाल का इलाहाबाद के बजाए दिल्ली, राजस्थान या मद्रास हाईकोर्ट स्थानांतरित करने का अनुरोध भी खारिज कर दिया है और एक बार फिर जस्टिस पीके जायसवाल को इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की गत 10 जनवरी की सिफारिश पर अपनी मुहर लगा दी है। कोलेजियम ने आग्रह अस्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें इसमे कोई मेरिट नजर नही आती।Posted By: Sachin Bajpai

January 18, 2019 15:56 UTC


एम्‍स में इलाज से तो खुश हैं मरीज मगर इस कारण हैं खफा, पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट

एम्‍स में इलाज से तो खुश हैं मरीज मगर इस कारण हैं खफा, पढ़िए स्पेशल रिपोर्टनई दिल्ली, जेएनएन। एम्स (दिल्ली) में इलाज के लिए पहुंचने वाले करीब एक चौथाई मरीज यहां की व्यवस्था व सुविधाओं से संतुष्ट नहीं होते। 'मेरा अस्पताल कार्यक्रम' के तहत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है। मरीजों की असंतुष्टि का सबसे बड़ा कारण खराब इलाज नहीं है, बल्कि कर्मचारियों का खराब व्यवहार है।लंबी प्रतीक्षा से ज्‍यादा परेशानीउन्हें सबसे ज्यादा परेशानी डॉक्टरों व पैरामेडिकल कर्मचारियों के व्यवहार से होती है। इसके अलावा भीड़ व इलाज के लिए लंबी प्रतीक्षा उनकी परेशानी और बढ़ा देती है। एम्स में इलाज की गुणवत्ता को लेकर मरीजों को कोई खास शिकायत नहीं है।मेरा अस्‍पताल कार्यक्रमचिकित्सा सुविधाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने मेरा अस्पताल कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों के मोबाइल फोन पर मैसेज भेजकर उनकी प्रतिक्रिया मांगी जाती है। वर्ष 2017 की रिपोर्ट में एम्स के 23 फीसद मरीजों ने इलाज व सुविधाओं से असंतुष्टि जताई थी। पुराने रिकार्ड में कोई सुधार नहीं हुआ है, बल्कि असंतुष्ट होकर लौटने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 24 फीसद हो गई है।एक लाख 93 हजार से अधिक मरीजों ने दी प्रतिक्रियाएम्स में एक साल में इलाज के लिए 20 लाख, 15 हजार 945 मरीज पहुंचे। इनमें से 16 लाख 83 हजार 65 मरीजों का मोबाइल नंबर सही पाया गया। इनमें से 1 लाख 93 हजार 842 मरीजों ने प्रतिक्रिया दी। इनमें से 33 फीसद मरीज इलाज से बहुत संतुष्ट, 43 फीसद संतुष्ट व 24 फीसद असंतुष्ट थे।39 फीसद मरीजों ने कहा कि कर्मचारी नहीं करते अच्छा व्यवहारसर्वे में 39 फीसद मरीजों ने कहा कि एम्स में कर्मचारी उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते। सात फीसद मरीजों ने साफ-सफाई की शिकायत की। प्रतीक्षा क्षेत्र, कॉरिडोर व शौचालयों में सफाई की समस्या ज्यादा है। वार्ड के अंदर सफाई की समस्या नहीं है। इलाज के खर्च पर 15 फीसद मरीजों ने नाखुशी जताई। इसका सबसे बड़ा कारण सभी मरीजों को दवा व जांच की सुविधाएं नहीं मिल पाना है। सिर्फ एक फीसद मरीजों ने इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए। इसके अलावा 38 फीसद मरीजों ने अन्य कारणों से नाखुशी जताई।कर्मचारियों के व्यवहार से नाखुश होने वाले मरीज

January 18, 2019 15:56 UTC


ट्रेन-18 गणतंत्र दिवस से पहले बनारस से दिल्ली चलाकर दिखाएगी

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ट्रेन-18 का निर्यात होगा। भारत की इस पहली सेमी-हाईस्पीड ट्रेन के प्रति विश्व के अनेक देशों ने गहरी रुचि दिखाई है। इनमें खाड़ी और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के अलावा अमेरिका और यूरोप के विकसित देश शामिल हैं। इसे देखते हुए रेल मंत्रालय ट्रेन-18 के निर्यात योग्य विभिन्न विकल्प तैयार करने पर विचार कर रहा है।रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ट्रेन-18 का अपने बूते निर्माण कर भारत ने हाई-स्पीड ट्रेनों के विशिष्ट समूह में जगह बना ली है। इससे भारतीय रेल का इंजीनियरिंग कौशल तो साबित हुआ ही है। साथ ही इस तथ्य की पुन: पुष्टि हुई है कि तकनीक के मामले में श्रेष्ठ किंतु किफायती विकल्प देने में भारत का कोई सानी नहीं है। इसी चीज ने ट्रेन-18 के प्रति विभिन्न देशों की उत्सुकता को बढ़ा दिया है और वे इसे भारत से आयात करने की इच्छा प्रकट कर रहे हैं।इस विषय में पूछे जाने पर रेलवे बोर्ड के सदस्य-रोलिंग स्टॉक, राजेश अग्रवाल ने कहा, 'ट्रेन-18 हमारी नवीनतम उपलब्धि है। इसे हासिल करने में हमें मात्र 18 महीने का समय लगा। हमें खुशी के साथ गर्व है कि यह स्वदेशी उत्पाद विदेशों में इतनी उत्सुकता पैदा कर रहा है। रोलिंग स्टॉक का वैश्विक बाजार 200 अरब डालर का है और हम इसमें बड़ी हिस्सेदारी हासिल करना चाहते हैं। इसलिए अब हमारा एकमात्र उद्देश्य ट्रेन-18 को सफलतापूर्वक चलाना है।'सूत्रों के मुताबिक यूरोप और अमेरिका में ट्रेन-18 जैसी ट्रेन तैयार करने में ढाई-तीन सौ करोड़ रुपये का खर्च आता है। जबकि भारत ने इसे मात्र सौ करोड़ रुपये में तैयार करके दिखा दिया है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार इस ट्रेन का जब भविष्य में उत्पादन बढ़ेगा तो लागत और कम होगी। इसी तरह थोड़ी सी अतिरिक्त लागत से हम ट्रेन को और अधिक सुविधासंपन्न बना सकते हैं। मसलन, पैंट्री के लिए अधिक जगह के साथ इसकी सारी सीटों में पुशबैक की सुविधा दी जा सकती है।रेलवे बोर्ड के अधिकारी फिलहाल ट्रेन-18 की पहली यात्रा की तैयारियों के साथ फरवरी में होने वाले अंतरराष्ट्रीय हाईस्पीड सम्मेलन का इंतजार कर रहे हैं। जिसमें उन्हें इन ट्रेन की मार्केटिंग के साथ अपनी इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा। इसके लिए ट्रेन-18 को गणतंत्र दिवस से पहले बनारस-दिल्ली रूट पर चलाने के इंतजाम पुख्ता किए जा रहे हैं। मुख्य संरक्षा आयुक्त ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है। माना जाता है कि संचालन को वैश्विक स्वरूप देने के लिए ट्रेन-18 का उपयोग प्रवासी भारतीयों को इलाहाबाद से दिल्ली लाने में किया जाएगा।Posted By: Ravindra Pratap Sing

January 18, 2019 15:56 UTC


Tags
Cryptocurrency      African Press Release      Lifestyle       Hiring       Health-care

Loading...