lifestyle: food items for irregular periods or irregular menstruation cycle- Navbharattimes Photogallery

65087773 अनियमित पीरियड्स के लिए बेस्ट हैं ये 5 फूड आइटम्स Web Title: lifestyle: food items for irregular periods or irregular menstruation cycle (Hindi News from Navbharat Times , TIL Network) 1/6 ​अनियमित पीरियड्स के लिए बेस्ट हैं ये 5 फूड आइटम्स Xआमतौर पर महिलाएं और लड़कियां अनियमित पीरियड्स की समस्या से परेशान होती हैं। भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी और बदलते लाइफस्टाइल में तो यह समस्या आम हो गई है। अनियमित पीरियड्स के लिए लड़कियां दवाइयों के साथ-साथ और न जाने क्या-क्या ट्राई नहीं करतीं, लेकिन कुछ फूड आइटम्स हैं, जिन्हें खाने से अनियमित पीरियड्स की प्रॉब्लम सुलझ जाएगी। आइए जानते हैं कि वे फूड आइटम्स कौन-कौन से हैं:अपने बारे में बताएं आपके कॉमेंट थोड़ी देर बाद अपने-आप साइट पर लाइव हो जाएंगे। हमने फिल्टर लगा रखे हैं ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द या कॉमेंट लाइव न होने पाएं। लेकिन अगर किसी कारण ऐसा हुआ तो इसकी सूचना मिलते ही हम उस कॉमेंट को साइट से हटा देंगे। जो पाठक हमारे पैमानों, उपयोग के नियमों व शर्तों, प्राइवसी नीतियों या इस साइट पर लागू होने वाली किसी भी नीति का उल्लंघन करेंगे, उन्हें ब्लॉक कर दिया जाएगा।शुक्रिया अपना कॉमेंट देने के लिये धन्यवाद. वेरिफिकेशन के लिए आपको एक ईमेल भेजी गई है। कृपया उस मेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

July 22, 2018 05:37 UTC


28 करोड़ से तैयार मल्टिलेवल पार्किंग, 600 क्षमता, गाड़ी खड़ी होती है सिर्फ 1 - Navbharat Times Hindi Newspaper

अहमदाबाद28 करोड़ की कीमत से तैयार मल्टिलेवल स्मार्ट पार्किंग एरिया। 600 गाड़ियां पार्क करने की क्षमता। पर, रोजाना इस पार्किंग में सिर्फ एक गाड़ी ही पार्क होती है। जी हां, चौंकिए नहीं। गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के कांकरिया में 28 करोड़ की कीमत से तैयार मल्टिलेवल स्मार्ट पार्किंग की हालत ऐसी ही है। वर्ष 2013 में इसे तैयार किया गया था, बावजूद इसके 600 क्षमता की इस पार्किंग में ज्यादातर दिन एक से अधिक वाहन पार्क होते नहीं दिखते।बता दें कि इस स्मार्ट पार्किंग से सिर्फ 100 मीटर की ही दूरी पर कांकरिया झील है। यहां हर रोज सैकड़ों लोग पहुंचते हैं लेकिन इनमें से कोई भी अपनी कार या बाइक खड़ी करने के लिए इस पार्किंग की सेवा नहीं लेता है। कांकरिया पार्किंग से जुड़े अधिकारियों का तर्क है कि कांकरिया झील पहुंचने वाले ज्यादातर लोग झील के किनारे फ्री पार्किंग में गाड़ी पार्क करना मुफीद पाते हैं। ऐसे में गाड़ियां मल्टिलेवल पार्किंग में नहीं आ रहीं। अहमदाबाद नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया, 'यूं तो मल्टिलेवल पार्किंग के आसपास गलियों या सड़कों में पार्किंग प्रतिबंधित है, बावजूद इसके कोई भी इस पार्किंग की सेवा लेने में रूचि नहीं दिखा रहा।शहर में फिलहाल तीन मल्टिलेवल पार्किंग हैं। इनमें से एक पार्किंग अभी सेवा में नहीं है। इनमें करीब 835 कार और 771 बाइक को पार्क करने की क्षमता है। बावजूद इसके यहां सिर्फ 200 गाड़ियां पार्क हो रही हैं, जिनमें दोपहिया वाहन एक भी नहीं हैं।कांकरिया मल्टिलेवल पार्किंग को जिसकी क्षमता 250 कार और 350 दोपहिया वाहनों की है, रखरखाव करनेवालों के अभाव के कारण ज्यादातर समय तक बंद रखना पड़ा है। यह हालत तब है जब अहमदाबाद नगर निगम को इसके रखरखाव के लिए 70 हजार रुपये महीने का खर्च उठाना पड़ रहा है।इसी एक जुलाई से निगम प्रशासन ने यहां की जिम्मेदारी उत्तम नगर सखी संघ की 7 महिलाओं को सौंपी है। इनमें से एक महिला लक्ष्मीबेन ने शुक्रवार को बताया कि पूरे दिन भर में सिर्फ एक कार पार्क की गई है और कुल 30 रुपये की कमाई हुई है। उन्होंने बताया कि लोग यहां पार्किंग के 30 रुपये देने की जगह बाहर सड़कों पर गाड़ियां पार्क कर देते हैं। लक्ष्मीबेन ने बताया कि कई बार लोग पार्किंग में आते हैं लेकिन रेट पूछने के बाद वापस लौट जाते हैं।शहर के एक अन्य मल्टिलेवल रिलीफ रोड पार्किंग के प्रभारी साबाज गौसी बताते हैं, करीब 80 गाड़ियां यहां हर रोज पार्किं में आती हैं लेकिन इनमें से ज्यादातार अहमदाबाद के बाहर की गाड़ियां होती हैं। हजारों की संख्या में गाड़ियां हर रोज सड़कों पर पार्क होती हैं लेकिन प्रशासन उनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाता है।नवरंगपुरा मल्टिलेवल पार्किंग को लेकर भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। यहां एक दिन गाड़ी पार्क करने के लिए 35 रुपये देने पड़ते हैं। आसपास के दुकानदारों का मानना है कि यह रेट अधिक है। वे कई बार अधिकारियों से पार्किंग के लिए मासिक पास सिस्टम शुरू करने की अपील कर चुके हैं। दुकानदारों के मुताबिक यहां भी सैकड़ों की संख्या में गाड़ियां बाहर सड़कों पर पार्क होती हैं।

July 22, 2018 05:15 UTC


जेल की सलाखों के पीछे रिहाई की टकटकी लगाए बूढ़ी आंखों में फिर लौटी उम्मीद की किरण - Navbharat Times Hindi Newspaper

यूपी के फतेहपुर के रहने वाले 92 साल के लाल सिंह की आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो रही है। उन्हें चलने-फिरने में भी दिक्कत होती है। वह हत्या के एक मामले में सजा मिलने के बाद पिछले करीब 20 सालों से नैनी जेल में बंद हैं। बांदा के बाबू शिवमंगल की उम्र भी करीब 92 साल है। वह भी हत्या के मामले में सजा मिलने पर नैनी जेल लाए गए थे। करीब 20 साल की सजा काट चुके हैं।90 साल या उससे अधिक की उम्र वाले 12 कैदी इस समय नैनी जेल में बंद हैं, जो अब अपराध करना तो दूर अपराध करने की सोच भी नहीं सकते। हालांकि, प्रदेश में ऐसे बंदियों की रिहाई के लिए कोई स्पष्ट नीति न होने के कारण उनकी रिहाई अधर में लटकी हुई है। ऐसे बंदियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कई बार राज्य सरकार को फटकार लगाई और समय देते हुए स्पष्ट नीति बनाने का आदेश दिया। हाई कोर्ट की फटकार के बाद अब इसे लेकर नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।सूत्रों के मुताबिक, इसका ड्राफ्ट करीब-करीब फाइनल हो चुका है। कुछ संशोधनों के बाद इसे दोबारा राज्यपाल के पास भेजे जाने की उम्मीद है। पहली बार राज्यपाल ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति के साथ इसे सरकार को वापस कर दिया था। हालांकि, अगले साल जनवरी से पहले इस नीति के अमल में आने की उम्मीद कम ही है।गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर देश में बड़े पैमाने पर कैदियों की रिहाई होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में अपनी आधी से अधिक सजा काट चुके उम्रदराज और दिव्यांग कैदियों को तीन चरणों में रिहा किए जाने का निर्णय लिया गया था। पहले चरण में एक तिहाई कैदियों को दो अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन इसके बाद अगले साल 10 अप्रैल को चंपारण सत्याग्रह की वर्षगांठ के अवसर पर एक तिहाई और शेष एक तिहाई कैदियों की रिहाई उसके बाद दो अक्टूबर को की जानी है।इसके लिए केंद्र जल्द ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जरूरी दिशानिर्देश जारी करेगा। हालांकि, रिहाई को लेकर कई शर्तें भी हैं और प्रदेश की जेलों में अब तक इससे संबंधित कोई दस्तावेज नहीं पहुंचा है, जिससे कैदियों की पहचान शुरू की जा सके।इलाहाबाद परिक्षेत्र के डीआईजी और नैनी जेल के वरिष्ठ अधीक्षक बीआर वर्मा बताते हैं कि वर्षों से 15 अगस्त और 26 जनवरी के अवसर पर वृद्ध और अशक्त कैदियों की प्रीमेच्यौर रिहाई की परंपरा रही है। ऐसे बंदी अब भी इन तारीखों पर रिहाई की आस देखते रहते हैं और आदेश न आने की स्थिति में अचानक जेल में ऐसे कैदियों की मृत्यु दर बढ़ जाती है, जो जेल प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। हालांकि, इस पर नीति बन जाने से काफी राहत मिलेगी।प्रदेश की करीब-करीब हर जेल में क्षमता से अधिक कैदी हैं। बावजूद इसके करीब 15 साल से 15 अगस्त और 26 जनवरी पर होने वाली वृद्ध व असक्त सजायाफ्ता कैदियों की प्रीमेच्यौर रिहाई बंद है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकार को इसके लिए एक स्पष्ट नीति बनाई थी लेकिन स्पष्ट नीति ना होने के कारण कैदियों की रिहाई नहीं हो पा रही है।यूपी की सबसे बड़ी जेलों में शुमार नैनी जेल में 1,800 के करीब सजायाफ्ता कैदी हैं। इनमें करीब 1,500 कैदी ऐसे हैं जिन्हें आजीवन कारावास की सजा मिली हुई है। इन कैदियों में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 262, 70 से 80 वर्ष के बीच वाले 124 और 80 वर्ष से अधिक उम्र के 25 कैदी शामिल हैं। दर्जन भर कैदी तो ऐसे हैं जो न ठीक से देख सकते हैं न चल-फिर सकते हैं।

July 22, 2018 04:16 UTC


deduction in gst rates these people will get profit- Navbharattimes Photogallery

65087502 5/9 छोटे कारीगरों को बढ़ावा Xवित्त मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि हैंडीक्राफ्ट, स्टोन, मार्बल और लकड़ी की बनी मूर्तियां, फूल वाली झाड़ू, साल पत्ते पर अब टैक्स नहीं लगेगा। दस्तकारी के छोटे सामानों को टैक्स में राहत दी गई है। हैंडबैग्स, जूलरी बॉक्स, पेटिंग के लिए लकड़ी के बॉक्स, आर्टवेयर ग्लास, हाथ से बने लैंप पर टैक्स घटाकर 12 फीसदी करने का फैसला किया गया है। बांस से बने सामनों से भी टैक्स 18 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी किया गया है। हैंडलूम की दरी पर टैक्स भी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया गया है।अपने बारे में बताएं आपके कॉमेंट थोड़ी देर बाद अपने-आप साइट पर लाइव हो जाएंगे। हमने फिल्टर लगा रखे हैं ताकि कोई आपत्तिजनक शब्द या कॉमेंट लाइव न होने पाएं। लेकिन अगर किसी कारण ऐसा हुआ तो इसकी सूचना मिलते ही हम उस कॉमेंट को साइट से हटा देंगे। जो पाठक हमारे पैमानों, उपयोग के नियमों व शर्तों, प्राइवसी नीतियों या इस साइट पर लागू होने वाली किसी भी नीति का उल्लंघन करेंगे, उन्हें ब्लॉक कर दिया जाएगा।शुक्रिया अपना कॉमेंट देने के लिये धन्यवाद. वेरिफिकेशन के लिए आपको एक ईमेल भेजी गई है। कृपया उस मेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

July 22, 2018 03:56 UTC


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