galaxy watch active: Samsung launched galaxy fit, galaxy fit e and galaxy watch active - Samsung ने लॉन्च की गैलेक्सी वॉच एक्टिव, Galaxy Fit और Fit e, शुरुआती कीमत 2,590 रुपये

दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग (Samsung) ने गैलेक्सी वियरेबल्स की एक नई रेंज लॉन्च की है। इन डिवाइसेज में Galaxy Watch Active , Galaxy Fit और Galaxy Fit e शामिल हैं। गैलेक्सी वॉच एक्टिव ब्लैक, सिल्वर, रोज गोल्ड और डीप ग्रीन इन 4 कलर में आएगी। गैलेक्सी वॉच एक्टिव की कीमत 19,990 रुपये है। वहीं, गैलेक्सी फिट सिल्वर और ब्लैक कलर में उपलब्ध है।सैमसंग की Galaxy Fit e ब्लैक, व्हाइट और येलो कलर में मिलेगी। गैलेक्सी फिट की कीमत 9,990 रुपये होगी। वहीं, Galaxy Fit e की कीमत 2,590 रुपये होगी। गैलेक्सी वॉच एक्टिव और गैलेक्सी फिट 25 जून से सभी रिटेल स्टोर्स और सैमसंग ओपेरा हाउस में उपलब्ध होगी। सैमसंग की गैलेक्सी वॉच एक्टिव सैमसंग ई-शॉप के अलावा Amazon.in पर भी उपलब्ध होगी। गैलेक्सी फिट फ्लिपकार्ट और मिंट्रा के साथ-साथ सैमसंग ई-शॉप पर भी मिलेगी। सैमसंग Galaxy Fit e 19 जुलाई तक फ्लिपकार्ट, मिंट्रा के अलावा सैमसंग ई-शॉप पर उपलब्ध होगी। इसके बाद Galaxy Fit e चुनिंदा ऑफलाइन स्टोर्स पर मिलेगी। ग्राहक 1 जुलाई से फ्लिपकार्ट पर गैलेक्सी फिट ई की प्री-बुकिंग कर सकेंगे। Galaxy Fit e 5 जुलाई से सेल के लिए उपलब्ध होगी।स्मार्टवॉच में 1.1 इंच की सर्कुलर एमोलेड स्क्रीन दी गई है, जिसका रेजॉलूशन 360x360 पिक्सल है। यह गोरिल्ला ग्लास 3 से कवर्ड है। गैलेक्सी वॉच एक्टिव में 230 mAh की बैटरी, ड्यूल-कोर Exynos 9110 प्रोसेसर दिया गया है। सैमसंग का दावा है कि सिंगल चार्ज पर गैलेक्सी वॉच एक्टिव की बैटरी 45 घंटे चलती है। इस स्मार्ट वॉच में 768MB की रैम और 4GB का ऑनबोर्ड स्टोरेज दिया गया है। स्मार्टवॉच में हार्ट रेट सेंसर भी दिया गया है। स्मार्टवॉच में वायरलेस चार्जिंग सपॉर्ट, ब्लूटूथ 4.2, एनएफसी और जीपीएस जैसे ऑप्शन हैं।गैलेक्सी फिट और गैलेक्सी फिट ई में 0.95 इंच का फुल-कलर एमोलेड डिस्प्ले दिया गया है। सैमसंग गैलेक्सी फिट आपको ऑन-द-मूव भी अपना एक्टिविटी डेटा देखने की सहूलियत देती है। फिटनेस बैंड आपके वॉकिंग, रनिंग और बाइकिंग जैसी एक्टिविटीज को ट्रैक कर सकती है। गैलेक्सी फिट में 2MB की रैम और 32MB की ROM दी गई है। इस फिटनेस बैंड में ब्लूटूथ v5.0 जैसे कनेक्टिविटी ऑप्शंस हैं। बैंड में 120mAh की बैटरी दी गई है।

June 25, 2019 13:07 UTC


jaipur News: किसान ने आत्महत्या की - farmer suicides

जयपुर, 25 जून (भाषा) राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर थाना क्षेत्र में एक किसान ने रविवार को कथित तौर पर सल्फास की गोलियां खाकर आत्महत्या कर ली। थानाधिकारी किशन सिंह ने मंगलवार को बताया कि ठाकरी गांव के किसान सोहनलाल (45) ने रविवार को सल्फास की गोलियां खाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिये परिजनों को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि इस संबंध सीआरपीसी की धारा 174 के तहत मर्ग दर्ज की गई थी। उसके बाद मृतक के पड़ोसी बलबीर ने एक कागज पेश कर दावा किया कि यह सुसाइड नोट है जो मृतक के घर से बरामद किया गया है। उन्होंने बताया कि इस सुसाइड नोट की जांच की जा रही है। सुसाइड नोट की लिखावट का मृतक की लिखावट से मिलान किया जायेगा। पुलिस के अनुसार मृतक किसान पर लगभग ढाई लाख का कर्ज था और कथित सुसाइड नोट के अनुसार वह कर्ज माफ नहीं होने से परेशान था और इसके लिए उसने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा है। इस किसान का यह कथित पत्र व एक वीडियो यहां सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

June 25, 2019 13:06 UTC


Chamki Fever: चमकी बुखार की भयावहता को भांपने में विफल रहा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय

नीलू रंजन, नई दिल्ली। Chamki Fever: मुजफ्फरपुर में डेढ़ सौ से ज्यादा बच्चों की जान लेने वाले चमकी बुखार के फैलने की असली वजह का अभी तक पता नहीं चल सका है। राज्य सरकार के हाथ पैर फूल चुके हैं और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास अभी तक इस बीमारी के महामारी का रूप लेने के संबंध में कोई ठोस रिपोर्ट नहीं है। सच्चाई यह है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को एक सप्ताह बाद इसकी भयावहता का अहसास हुआ।एक पखवाड़ा पहले बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन से मुलाकात कर स्थिति की जानकारी दी और केंद्रीय मदद की गुहार लगाई। 11 जून को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने स्थिति की समीक्षा की और 12 जून को उच्चस्तरीय विशेषज्ञों के दल को मुजफ्फरपुर पहुंचने का आदेश दिया।13 जून को पांडेय फिर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से मिले और उन्होंने कोई ठोस कदम उठाने के बजाय राज्य सरकार को लोगों के बीच जागरूकता फैलाने, एनजीओ की मदद लेने, बीमार बच्चों को तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराने और बीमारी को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन को सक्रिय रूप से जोड़ने जैसे सुझाव दिए।मंगल पांडेय से पहली मुलाकात के छह दिन बाद 15 जून को हर्षवर्धन को भयावहता का अहसास हुआ और उन्होंने खुद मुजफ्फरपुर जाकर हालात का जायजा लेने का फैसला लिया। जाहिर है तब तक बच्चों के हर दिन मरने का सिलसिला जारी रहा।पांच प्रयोगशाला खोलने का फैसला16 जून को मुजफ्फरपुर दौरे से लौटने के बाद 17 जून को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। जिसमें आइसीएमआर दिल्ली, निमहांस बेंगलुरु, राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान, राष्ट्रीय आहार संस्थान हैदराबाद, राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान पुणे, राष्ट्रीय महामारी संस्थान चेन्नई और एम्स के विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय टीम गठित कर उन्हें मुजफ्फरपुर रवाना करने का फैसला हुआ। इसके साथ ही अलग-अलग जिलों में पांच प्रयोगशाला खोलने का निर्णय लिया गया।100 बिस्तरों वाला आइसीयू स्थापित करने की घोषणायहीं नहीं, मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की हालत और बच्चों के इलाज के लिए मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखकर लौटे हर्षवर्धन ने वहां केंद्र सरकार की मदद से बच्चों के लिए 100 बिस्तरों वाला आइसीयू स्थापित करने की घोषणा की। साथ ही मुजफ्फरपुर में उच्चस्तरीय अनुसंधान केंद्र खोलने का भी फैसला लिया।18 जून तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अहसास हो गया कि चमकी बुखार और उससे बच्चों की मौत के लिए कोई एक वजह जिम्मेदार नहीं है। बल्कि कई चीजें सामूहिक रूप से मिलकर जानलेवा साबित हो रही हैं। इसके बाद एनसीडीसी, एम्स, आइसीएमआर, डब्ल्यूएचओ, सीडीसी, आइएपी, विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय व महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के विशेषज्ञों के साथ-साथ मौसम विज्ञान, पोषण एवं कृषि विज्ञान के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक बड़ी उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की गई।यह समिति खास मौसम में खास जगह पर फैलने वाली जानलेवा बीमारी के सभी पहलुओं की जांच कर उनसे निपटने के लिए विस्‍तृत रिपोर्ट देगी। लेकिन बड़े-बड़े फैसलों और वादों के बीच मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत का सिलसिला जारी रहा। इसको लेकर पूरे देश में फैले आक्रोश को देखते हुए 19 जून को दिल्ली के राममनोहर लोहिया, सफदरजंग और लेडी हार्डिग अस्पताल के 10 बाल रोग चिकित्सकों की टीम को मुजफ्फरपुर रवाना किया गया।16 नोडल टीमें तैनात करने का फैसलाप्रभावित क्षेत्र में बीमारी से पीड़ित लोगों की आर्थिक स्थिति का पता लगाने के लिए सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण टीमें भी रवाना की गई। इसके अलावा 10 नई एंबुलेंस और वरिष्ठ डाक्टरों व प्रशासनिक अधिकारियों की 16 नोडल टीमें भी तैनात करने का फैसला हुआ। दावा किया जा रहा है कि हर स्तर पर रोजाना केंद्र से भी निगरानी की जा रही है लेकिन पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी हाथ खाली है।लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एपPosted By: Arun Kumar Singh

June 25, 2019 13:05 UTC


India News: पीएम नरेंद्र मोदी का कांग्रेस पर अटैक, सत्ता बचाने के लिए देश को बना दिया था जेलखाना - pm narendra modi attacked on congress over emergency in lok sabha

हाइलाइट्स लोकसभा में पीएम मोदी ने दिखाए आक्रामक तेवर, कांग्रेस पर अटैकपिछली सरकारों के योगदान को भूलने के आरोपों का दिया करारा जवाबप्रणव मुखर्जी को भारत रत्न दिए जाने के सरकार के फैसले का किया जिक्रकहा, हम किसी लकीर को छोटी करने में समय बर्बाद नहीं करतेलोकसभा में पीएम मोदीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में विपक्ष पर करारा प्रहार किया। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को भारत रत्न देने के अपनी सरकार के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों पर भी पलटवार किया जिसमें कहा गया था कि पहले की सरकारों के योगदान को उन्होंने नकार दिया है। पीएम ने आगे तंज कसते हुए कहा, 'कल सदन में नारे लगाए जा रहे थे और आज 25 जून है।' उन्होंने कहा कि कई लोगों को तो जानकारी भी नहीं है कि 25 जून को क्या हुआ था, अगल-बगल पूछना पड़ता है। ऐसे में यह याद दिलाना जरूरी है कि 25 जून की रात देश की आत्मा को कुचल दिया गया था। उन्होंने कहा कि सिर्फ अपनी सत्ता बचाने के लिए देश को जेलखाना बना दिया गया था। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल के 3 हफ्ते की उपलब्धियों का भी जिक्र किया।पीएम ने आगे कहा, 'भारत में लोकतंत्र संविधान के पन्नों से पैदा नहीं हुआ है, भारत में लोकतंत्र सदियों से हमारी आत्मा है। उस आत्मा को कुचल दिया गया था, मीडिया को दबोच लिया गया था। देश के महापुरुषों को सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था। देश को जेलखाना बना दिया गया था और सिर्फ इसलिए कि किसी की सत्ता न चली जाए।' उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का फैसला था, कोर्ट का अनादर कैसे होता है, उसका वह जीता-जागता उदाहरण है।पीएम ने कहा कि आज हमें लोकतंत्र के प्रति फिर एक बार अपना संकल्प समर्पित करना होगा। उस समय जो भी इस पाप के भागीदार थे, ये दाग कभी मिटने वाला नहीं है। इसका स्मरण करना भी जरूरी है ताकि फिर कोई पैदा न हो जिसे इस रास्ते पर जाने की इच्छा हो जाए। उन्होंने कहा कि यह किसी को भला-बुरा कहने के लिए नहीं है।पीएम ने कहा कि उस समय मीडिया पर ताले थे, हर किसी को लगता था कि पुलिस पकड़ लेगी। जाति, पंथ, संप्रदाय से ऊपर उठकर देश ने उस समय चुनाव में नतीजा दिया था। मतदाताओं ने लोकतंत्र को फिर से स्थापित किया था। इस बार फिर एक बार देश ने पंथ, जाति, संप्रदाय से ऊपर उठकर मतदान किया है।PM ने कहा कि यहां कुछ तीखी बातें बताई गईं, ज्यादातर चुनावी सभाओं की बातें बताई गईं। उन्होंने कहा कि हर एक का अपना अजेंडा होता है लेकिन यहां कहा गया कि हमारी ऊंचाई को कोई कम नहीं कर सकता है। पीएम ने चुटीले अंदाज में कहा, 'हम किसी लकीर को छोटी करने में समय बर्बाद नहीं करते। हम हमारी लकीर को लंबी करने के लिए जिंदगी खपा देते हैं। आपकी ऊंचाई आपको मुबारक क्योंकि आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि आपको जमीन दिखना बंद हो गई। आप इतने ऊंचे चले गए हैं कि जमीन से उखड़ चुके हैं। आपको जमीन के लोग तुच्छ दिखते हैं और इसलिए आपका और ऊंचा होना मेरे लिए अत्यंत संतोष और आनंद की बात है। मेरी कामना है कि आप और ऊंचे बढ़ें।' PM ने कहा कि हमारा सपना ऊंचा होने का नहीं, जड़ों से जुड़ने का है। हमारा सपना जड़ों से मजबूती पाकर देश को आगे ले जाना है। हम आपको शुभकामनाएं ही देंगे कि आप और ऊंचे, और ऊंचे जाइए।पीएम ने कहा, '2004 से पहले देश में वाजपेयी सरकार थी। 2004 से 2014 में शासन में बैठे लोग सरकारी कार्यक्रमों में अटल बिहारी वाजपेयी की तारीफ की हो, नरसिम्हा राव की सरकार या अभी के भाषणों में भी किसी ने मनमोहन सिंह का नाम लिया हो तो बताएं।' उन्होंने बताया, 'लाल किले से शायद मैं पहला प्रधानमंत्री हूं जिसने आजादी से लेकर केंद्र और राज्य की जितनी सरकारें हुईं, सबका देश को आगे ले जाने में योगदान है, इसे कहा। सदन में भी मैंने कई बार कहा है और दोबारा कहता हूं।'अपने सीएम कार्यकाल का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, 'गुजरात के 50 साल हुए थे। उस गोल्डन जुबिली इयर का एक महत्वपूर्ण काम मैं बताना चाहता हूं। मैंने 50 साल में हुए सभी राज्यपालों के भाषणों का ग्रंथ बनाने की सोची और उसमें सरकारों के काम का लेखाजोखा था। हमारे दल की सरकारें नहीं थी, लेकिन यह हमारी सोच का हिस्सा था। यह आज भी उपलब्ध है इसलिए यह कहना कि पहले जो काम हुए हैं उसको हम गिनते ही नहीं हैं, गलत है।'पीएम ने आक्रामक अंदाज में कहा, 'बार-बार सुनाने का हक उन्हीं को है जिन्होंने कभी किसी को स्वीकार किया हो वरना देश को लगता था कि उनके कार्यकाल में नरसिम्हा राव को भारत रत्न मिलता, मनमोहन सिंह को मिलता लेकिन परिवार से बाहर के लोगों को कुछ नहीं मिलता है। हम हैं, हमारी सोच है, प्रणव दा किस पार्टी के थे, किसके लिए उन्होंने जीवन खपाया? लेकिन उनका देश के लिए योगदान था, इस कारण भारत रत्न देने का निर्णय किया गया इसलिए कृपा करके (कहा कि यह कहते हुए अच्छा नहीं लग रहा है) बार-बार मुझे सुनाया न जाए। हम किसी के योगदान को नकारते नहीं हैं।'पीएम ने अपने भाषण के दौरान कहा, 'जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का, फिर देखना फिजूल है कद आसमान का'। उन्होंने कहा कि हम इसी मिजाज के साथ आगे बढ़ रहे हैं। पीएम ने अपनी सरकार ने 3 सप्ताह के भीतर लिए गए कई महत्वपूर्ण फैसले भी गिनाए। उन्होंने कहा, 'छोटे किसान, मजदूर के लिए 60 साल बाद पेंशन, पीएम किसान योजना के तहत सभी किसानों को दायरे में लाया गया, सेना के जवानों के बच्चों को स्कॉलरशिप में वृद्धि, इसके साथ ही पुलिस के जवानों के बच्चों को भी लाभ का फैसला हुआ। मानव अधिकारों से जुड़े अहम कानून लाने के लिए तैयारी पूरी की।' उन्होंने कहा कि गिनती करेंगे तो रोज करीब तीन बड़े फैसले लिए गए।मोदी ने कहा कि 5 साल हमारे मन में यही भाव रहा कि जिसका कोई नहीं उसके लिए सरकार होती है। उन्होंने कहा कि जाने-अनजाने हमने आजादी के बाद एक ऐसे कल्चर को बढ़ावा दिया जिसमें सामान्य इंसान को अपने हक के लिए व्यवस्था से लड़ना पड़ता है। उन्

June 25, 2019 12:46 UTC


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